सरोगेट मदर वह महिला होती है जो किसी दूसरे दंपत्ति के लिए गर्भधारण करती है और बच्चे को जन्म देती है। जन्म के बाद बच्चा उसके इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है।
भारत में सरोगेसी सिर्फ कानून के दायरे में हो सकती है। सरोगेट मदर को कोई फीस नहीं दी जाती।
- बच्चे से रिश्ता: सरोगेट मदर का बच्चे से कोई जेनेटिक (DNA) संबंध नहीं होता।
- कौन बन सकती है: शादीशुदा रह चुकी (ever-married), 25 से 35 साल की महिला, जिसका अपना एक बच्चा हो।
- पैसे का नियम: कमर्शियल सरोगेसी बैन है। सिर्फ उसका मेडिकल खर्च, बीमा और जरूरी खर्च उठाया जाता है।
- कुल लागत: पूरी सरोगेसी का खर्च आम तौर पर ₹15 लाख से ₹25 लाख के बीच रहता है।
और पढ़ें: भारत में सरोगेसी की लागत: वो बातें जो आपको नहीं बताई जातीं (2026)
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ताज़ा अपडेट (2026): सरोगेसी से जुड़ी दो बड़ी खबरें
1. राजस्थान में सरोगेसी से मां बनने वाली सरकारी कर्मचारियों को छुट्टी
राजस्थान सरकार ने सितंबर 2026 में सेवा नियमों में बदलाव कर सरोगेसी मैटरनिटी लीव का प्रावधान जोड़ा है।
- सरोगेट मदर: 180 दिन तक की मैटरनिटी लीव। उसकी उम्र 25 से 35 साल हो और उसका अपना एक बच्चा हो।
- इच्छुक मां (कमीशनिंग मदर): 90 दिन की छुट्टी। उम्र 23 से 50 साल हो और कोई जीवित जैविक, गोद लिया या सरोगेसी से हुआ बच्चा न हो।
- सीमा: पूरी सेवा में अधिकतम दो मामलों तक।
- जरूरी शर्त: प्रक्रिया सरोगेसी (नियमन) अधिनियम 2021 के तहत हो, और मेडिकल बोर्ड या सक्षम स्वास्थ्य अधिकारी का प्रमाणपत्र लगे।
- पहले क्या था: राजस्थान सेवा नियम, 1951 में सरोगेसी लीव का कोई साफ़ प्रावधान नहीं था।
केंद्र सरकार में क्या है? जून 2024 में केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियमों में बदलाव हुआ। इसमें सरोगेट मदर और इच्छुक मां, दोनों को 180 दिन की छुट्टी और इच्छुक पिता को 15 दिन की छुट्टी मिलती है।
2. लखनऊ में अवैध सरोगेसी रैकेट की रिपोर्ट
हाल की एक मीडिया रिपोर्ट में लखनऊ में अवैध कमर्शियल सरोगेसी का नेटवर्क चलने का दावा किया गया है।
- रिपोर्ट के मुताबिक बिना लिखित समझौते और बिना मंजूरी वाले केंद्रों में महिलाओं की “कोख” का सौदा किया जा रहा था।
- कहा गया कि महिला की उम्र और शक्ल के हिसाब से 5 लाख से 15 लाख रुपये तक मांगे जाते थे।
- रिपोर्ट में लिखित अनुबंध न होने की बात भी कही गई, ताकि कानूनी जवाबदेही से बचा जा सके।
- ये दावे मीडिया रिपोर्ट के हैं और किसी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
इससे आपको क्या सीख मिलती है?
- भारत में सरोगेट मदर को पैसे देकर सरोगेसी कराना अपराध है। इसमें जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
- दलाल या एजेंट के भरोसे न रहें। सिर्फ सरकारी रूप से रजिस्टर्ड क्लिनिक चुनें।
- बिना लिखित कागजों और बिना कानूनी मंजूरी के कोई प्रक्रिया शुरू न करें।
और पढ़ें: क्या आपको सरोगेसी के लिए पैसे देने पड़ते हैं? आपका पूरा और विस्तृत जवाब
सरोगेट मदर क्या होती है?
जो महिला किसी दूसरे परिवार के लिए गर्भ धारण करके बच्चे को जन्म देती है, उसे सरोगेट मदर कहते हैं।
- बच्चे के जन्म के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर बच्चा इच्छुक माता-पिता का होता है।
- सरोगेट मदर को बच्चे पर कोई कानूनी अधिकार नहीं रहता।
- भारत में यह सिर्फ अल्ट्रुइस्टिक (बिना भुगतान वाली) सरोगेसी के रूप में ही मान्य है।
और पढ़ें: भारत में 2026 में सरोगेट मदर का खर्च: माता-पिता को असल में कितना भुगतान करना पड़ता है
सरोगेट मदर का हिंदी में अर्थ क्या है?
सरोगेट (Surrogate) का मतलब है किसी और की जगह काम करने वाला। इसलिए सरोगेट मदर को “किराये की कोख” नहीं, “स्थानापन्न माता” कहना ज्यादा सही है।
- स्थानापन्न माता
- किसी और परिवार के लिए गर्भ धारण करने वाली महिला
- सरोगेट माता
आम बोलचाल में सरोगेट मदर शब्द ही सबसे ज्यादा चलता है।
सरोगेसी कितने प्रकार की होती है?
दुनिया में सरोगेसी दो तरह की होती है, लेकिन भारत में सिर्फ जेस्टेशनल सरोगेसी की इजाज़त है।
1. पारंपरिक सरोगेसी (Traditional Surrogacy)
- इसमें सरोगेट महिला के अपने अंडाणु का इस्तेमाल होता है।
- बच्चे और सरोगेट महिला के बीच जेनेटिक संबंध बनता है।
- भारत में यह नहीं चलती। कानून के मुताबिक सरोगेट महिला अपने अंडाणु नहीं दे सकती।
2. जेस्टेशनल सरोगेसी (Gestational Surrogacy)
- IVF से इच्छुक माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु से भ्रूण बनाया जाता है।
- भ्रूण को सरोगेट महिला के गर्भाशय में रखा जाता है।
- सरोगेट महिला सिर्फ गर्भ धारण करती है। बच्चे का DNA इच्छुक माता-पिता का होता है।
अल्ट्रुइस्टिक बनाम कमर्शियल: भारत में सिर्फ अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी मान्य है, यानी सरोगेट मदर को कोई फीस नहीं मिलती। कमर्शियल (पैसे वाली) सरोगेसी गैरकानूनी है।
और पढ़ें: अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी क्या है? अर्थ, कानूनी नियम और पात्रता
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सरोगेट मदर की जरूरत कब पड़ती है?
जब किसी महिला के लिए खुद गर्भधारण करना या गर्भावस्था पूरी करना मेडिकल कारणों से सुरक्षित न हो।
- गर्भाशय की समस्या: गर्भाशय जन्म से न हो, विकसित न हो या बीमारी में हटाना पड़ा हो।
- बार-बार गर्भपात: गर्भावस्था पूरी न हो पा रही हो।
- IVF बार-बार फेल होना: कई कोशिशों के बाद भी गर्भधारण न हुआ हो।
- गंभीर बीमारी: गर्भावस्था महिला की जान या सेहत के लिए खतरा हो।
सरोगेसी तभी करवाई जा सकती है जब डॉक्टर यह प्रमाणित करें कि इसकी मेडिकल जरूरत है।
सरोगेट मदर बनने के लिए पात्रता (eligibility)क्या है?
कानून के मुताबिक सरोगेट मदर शादीशुदा रह चुकी (ever-married) महिला होनी चाहिए, जिसकी उम्र 25 से 35 साल हो और जिसका अपना एक बच्चा हो।
- उम्र: 25 से 35 साल।
- अपना बच्चा: कम से कम एक अपना बच्चा होना जरूरी है।
- सिर्फ एक बार: कोई महिला पूरी जिंदगी में एक ही बार सरोगेट बन सकती है।
- अपने अंडाणु नहीं: वह अपने अंडाणु नहीं दे सकती। बच्चे से उसका जेनेटिक संबंध नहीं होना चाहिए।
- सेहत: मेडिकल और मानसिक फिटनेस की जांच जरूरी है।
- लिखित सहमति: प्रक्रिया से पहले उसकी लिखित और सोची-समझी सहमति चाहिए।
- प्रमाणपत्र: राज्य की संबंधित अथॉरिटी से पात्रता का सर्टिफिकेट लेना पड़ता है।
- रिश्तेदार होना जरूरी नहीं: वह इच्छुक दंपत्ति की रिश्तेदार हो, यह जरूरी नहीं है।
और पढ़ें: भारत में सरोगेसी के लिए कौन पात्र है?
सरोगेट मदर की मेडिकल और मानसिक जांच क्यों होती है?
ताकि गर्भावस्था सुरक्षित रहे और महिला पर कोई दबाव न हो।
मेडिकल जांच में शामिल हो सकते हैं:
- रक्त परीक्षण
- गर्भाशय की जांच
- संक्रमण की जांच
- सामान्य स्वास्थ्य की जांच
मानसिक (मनोवैज्ञानिक) जांच में देखा जाता है:
- क्या महिला मानसिक रूप से तैयार है
- क्या उस पर किसी तरह का दबाव तो नहीं है
- क्या उसके परिवार का सहयोग है
- क्या वह जन्म के बाद बच्चे को सौंपने के लिए भावनात्मक रूप से तैयार है
इसमें काउंसलिंग और बातचीत भी शामिल हो सकती है।

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सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया कैसे होती है?
सरोगेसी 7 चरणों में पूरी होती है, और कानूनी मंजूरी मेडिकल प्रक्रिया से पहले चाहिए।
- चरण 1: पात्रता और जांच। इच्छुक दंपत्ति और सरोगेट मदर, दोनों की मेडिकल, कानूनी और मनोवैज्ञानिक जांच होती है।
- चरण 2: कानूनी सर्टिफिकेट। जरूरत और पात्रता के सर्टिफिकेट मिलते हैं।
- चरण 3: हार्मोनल तैयारी। गर्भाशय को भ्रूण के लिए तैयार किया जाता है।
- चरण 4: IVF से भ्रूण बनाना। लैब में अंडाणु और शुक्राणु से भ्रूण बनता है।
- चरण 5: भ्रूण ट्रांसफर। भ्रूण को सरोगेट के गर्भाशय में रखा जाता है।
- चरण 6: गर्भावस्था की निगरानी। नियमित जांच, अल्ट्रासाउंड, दवाएं और पोषण।
- चरण 7: प्रसव और हस्तांतरण। जन्म के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होती है और बच्चा इच्छुक माता-पिता को मिलता है।
और पढ़ें: भारत में सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
सरोगेसी में कानूनी प्रक्रिया क्यों जरूरी है?
क्योंकि यह सिर्फ मेडिकल नहीं, कानूनी प्रक्रिया भी है। कानून सभी पक्षों के अधिकार और जिम्मेदारी साफ़ तय करता है।
- सरोगेसी (नियमन) अधिनियम, 2021 के तहत ही सरोगेसी हो सकती है।
- सरोगेट मदर का 36 महीने का बीमा कराना अनिवार्य है।
- सिर्फ रजिस्टर्ड क्लिनिक में ही प्रक्रिया हो सकती है।
- सभी सहमति पत्र और कागज़ात पहले से तैयार होने चाहिए।
और पढ़ें: भारत में सरोगेसी कानून 2026: नए नियम, अधिकार और अपडेट
क्या किसी महिला को जबरन सरोगेट मदर बनाया जा सकता है?
नहीं। सरोगेट मदर बनने के लिए महिला की अपनी स्वैच्छिक और लिखित सहमति जरूरी है।
- सहमति ऐसी भाषा में ली जाती है जो महिला समझती हो।
- भ्रूण गर्भाशय में रखे जाने से पहले वह अपनी सहमति वापस ले सकती है।
- मेडिकल जांच, मनोवैज्ञानिक जांच और काउंसलिंग इसलिए रखी गई हैं कि कोई दबाव या मजबूरी न हो।
- पैसे देकर या दबाव डालकर सरोगेसी कराना कानूनन अपराध है।
और पढ़ें: भारत में सरोगेसी कानून 2026: नए नियम, अधिकार और अपडेट
सरोगेट मदर का भावनात्मक पक्ष
नौ महीने बच्चे को गर्भ में रखकर उसे सौंप देना भावनात्मक रूप से आसान नहीं होता।
- इसलिए पूरी प्रक्रिया में काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग जरूरी माना जाता है।
- परिवार का साथ सरोगेट मदर के लिए बहुत मायने रखता है।
- वह कई परिवारों को माता-पिता बनने का मौका देने में अहम भूमिका निभाती है।
सरोगेसी में कुल कितना खर्च आता है?
भारत में एक बच्चे के लिए पूरी सरोगेसी का खर्च आम तौर पर ₹15 लाख से ₹25 लाख होता है।
- इसमें IVF, सरोगेट मदर की मेडिकल देखभाल और बीमा, कानूनी काम और डिलीवरी शामिल है।
- सरोगेट मदर को फीस नहीं दी जाती। उसकी सिर्फ मेडिकल देखभाल और बीमा का खर्च जुड़ता है।
- शहर और क्लिनिक के हिसाब से खर्च थोड़ा बदल सकता है।
और पढ़ें: दिल्ली में सरोगेसी की लागत (2026): अद्यतन लागत और कानूनी गाइड
ConsultGrab आपकी कैसे मदद करता है
सरोगेसी से जुड़ा हर मामला अलग होता है, और गलत जानकारी से बड़ा नुकसान हो सकता है। ConsultGrab आपको सही विशेषज्ञ और रजिस्टर्ड क्लिनिक तक पहुंचने में मदद करता है।
- हम आपकी स्थिति को विस्तार से समझते हैं।
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और पढ़ें: भारत में सरोगेट मदर को क्या मिलता है? बीमा और खर्चों के बारे में जानकारी
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
वह महिला जो किसी दूसरे दंपत्ति के लिए गर्भधारण करके बच्चे को जन्म देती है। जन्म के बाद बच्चा इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है।
भारत में सरोगेट मदर का बच्चे से कोई जेनेटिक संबंध नहीं होता। बच्चे का DNA इच्छुक माता-पिता का होता है।
25 से 35 साल। साथ ही उसका अपना कम से कम एक बच्चा होना जरूरी है।
नहीं। कानून के मुताबिक एक महिला पूरी जिंदगी में सिर्फ एक बार सरोगेट मदर बन सकती है।
नहीं। भारत में कमर्शियल सरोगेसी बैन है। उसका सिर्फ मेडिकल खर्च, बीमा और जरूरी खर्च दिया जाता है।
नहीं। इसके लिए महिला की अपनी लिखित और स्वैच्छिक सहमति जरूरी है।
नहीं। भारत में सरोगेट महिला अपने अंडाणु का इस्तेमाल नहीं कर सकती। सिर्फ जेस्टेशनल सरोगेसी मान्य है।
IVF से लैब में इच्छुक माता-पिता के अंडाणु और शुक्राणु से भ्रूण बनता है। फिर उसे सरोगेट के गर्भाशय में रखा जाता है।
राजस्थान में सितंबर 2026 से सरोगेट मदर को 180 दिन की छुट्टी का प्रावधान है। केंद्र सरकार में भी 2024 से यह छुट्टी मिलती है।
भारत में एक बच्चे के लिए आम तौर पर ₹15 लाख से ₹25 लाख।
निष्कर्ष (Conclusion)
सरोगेट मदर वह महिला है जो किसी और परिवार के लिए गर्भधारण करके बच्चे को जन्म देती है। भारत में सिर्फ जेस्टेशनल और अल्ट्रुइस्टिक सरोगेसी मान्य है।
- सरोगेट मदर 25 से 35 साल की, ever-married और अपने एक बच्चे वाली महिला होनी चाहिए।
- उसे कोई फीस नहीं दी जाती, और उसकी सहमति स्वैच्छिक और लिखित होनी चाहिए।
- हाल की खबरों से सीख: सिर्फ रजिस्टर्ड क्लिनिक चुनें और दलालों से दूर रहें।
- राजस्थान और केंद्र सरकार के नियमों से सरोगेसी से जुड़ी महिला कर्मचारियों को छुट्टी का अधिकार भी मिला है।
अपने केस पर सही सलाह चाहिए तो ConsultGrab आपको विशेषज्ञ से जोड़ सकता है।
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