सीधा जवाब
हां, भारत में सरोगेसी पूरी तरह कानूनी है, लेकिन इसे बहुत सख्त और स्पष्ट नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है। भारत में सिर्फ परमार्थ (Altruistic) सरोगेसी की अनुमति है — यानी पैसे लेकर या व्यावसायिक तौर पर सरोगेसी कराना पूरी तरह गैरकानूनी है। यह पूरा ढांचा सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 पर आधारित है।
अगर आप या आपका परिवार सरोगेसी के जरिए पैरेंटहुड का रास्ता खोज रहे हैं, तो कानून को समझना पहला और सबसे ज़रूरी कदम है। दिल्ली एनसीआर में, जहां देश के कुछ सबसे अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ और सत्यापित क्लीनिक मौजूद हैं, यह जानकारी और भी अहम हो जाती है — अगर आप बजट प्लान कर रहे हैं तो हमारी विस्तृत Delhi में सरोगेसी की लागत गाइड देख सकते हैं। नीचे पूरी प्रक्रिया, पात्रता और नियमों को आसान भाषा में समझाया गया है।
सरोगेसी की कानूनी परिभाषा क्या है?
सरोगेसी एक ऐसी चिकित्सकीय-कानूनी व्यवस्था है जिसमें कोई महिला किसी इच्छुक दंपति या इच्छुक महिला के लिए गर्भधारण करती है, और जन्म के बाद बच्चे को उन्हें सौंपने का स्पष्ट इरादा रखा जाता है।
सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत इसकी परिभाषा में दो बातें अनिवार्य मानी गई हैं:
- गर्भधारण किसी दूसरे व्यक्ति या दंपति के लिए किया जाना चाहिए
- जन्म देने वाली महिला का यह स्पष्ट इरादा होना चाहिए कि बच्चे को इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाएगा
भारत में सरोगेसी केवल निस्वार्थ भाव से की जा सकती है — सरोगेट मां को सिर्फ चिकित्सा और बीमा संबंधी खर्च दिए जा सकते हैं, किसी भी तरह का मुनाफा या भुगतान कानूनन प्रतिबंधित है। पूरे कानून की गहराई से जानकारी के लिए हमारी भारत में सरोगेसी अधिनियम पर विस्तृत लीगल गाइड पढ़ें।
यह कानून लाया ही क्यों गया?
2021 से पहले भारत में सरोगेसी को नियंत्रित करने वाला कोई ठोस कानून नहीं था। नतीजा यह हुआ कि भारत तेज़ी से एक वैश्विक कमर्शियल सरोगेसी हब बनता जा रहा था — विदेश से लोग यहां कम लागत में सरोगेसी कराने आते थे।
इससे कई गंभीर समस्याएं सामने आईं:
- आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं का शोषण
- बिचौलियों और एजेंसियों द्वारा सरोगेसी को व्यवसाय बनाना
- जन्मे बच्चों की नागरिकता और अभिभावकता को लेकर कानूनी विवाद
- कुछ मामलों में बच्चे को जन्म के बाद छोड़ दिए जाने की घटनाएं
इन्हीं वजहों से सरकार ने सरोगेसी को परमार्थ के दायरे में सीमित करने, महिलाओं के शोषण को रोकने और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कानून लागू किया।

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सरोगेसी क्लीनिक के लिए क्या नियम हैं?
हर वह क्लीनिक जहां IVF या ART तकनीकों के ज़रिए सरोगेसी कराई जाती है, उसका पंजीकरण अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के क्लीनिक चलाना दंडनीय अपराध है।
क्लीनिकों से जुड़े प्रमुख नियम:
| नियम | विवरण |
|---|---|
| पंजीकरण | अनिवार्य, बिना पंजीकरण संचालन गैरकानूनी |
| भुगतान | केवल मेडिकल खर्च और बीमा, मुनाफा नहीं |
| स्टाफ योग्यता | निर्धारित मानकों वाले डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ ज़रूरी |
| विज्ञापन | पूर्ण रूप से प्रतिबंधित |
| लिंग चयन | पूरी तरह अवैध |
| एम्ब्रियो/गेमेट स्टोरेज | कड़े नियमों के तहत विनियमित |
नियमों के उल्लंघन पर 5 से 10 साल तक की जेल और 5 से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। 2026 में लागू हुए ताज़ा संशोधनों और अपडेटेड नियमों की पूरी जानकारी के लिए भारत में सरोगेसी कानून के नए नियम (2026) देखें।
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सरोगेसी के लिए कौन पात्र है?
इच्छुक दंपति की पात्रता
- केवल भारतीय विवाहित दंपति पात्र हैं, विदेशी नागरिक भारत में सरोगेसी नहीं करा सकते
- पुरुष की आयु 26 से 55 वर्ष, महिला की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए
- विधवा या तलाकशुदा महिलाओं के लिए आयु सीमा 35 से 45 वर्ष है
- किसी अधिकृत मेडिकल बोर्ड से यह प्रमाणित होना ज़रूरी है कि दंपति चिकित्सकीय कारणों से स्वाभाविक गर्भधारण नहीं कर सकते
सरोगेट मां की पात्रता
- विवाहित होना अनिवार्य
- कम से कम एक अपना बच्चा होना चाहिए
- जीवनकाल में केवल एक बार सरोगेट बन सकती है
- शारीरिक और मानसिक फिटनेस प्रमाण पत्र आवश्यक
- गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य
- व्यवहार में, ज़्यादातर मामलों में सरोगेट मां को इच्छुक दंपति की करीबी रिश्तेदार होना अपेक्षित है, ताकि पहचान और भरोसे से जुड़ी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे
किन्हें सरोगेसी की अनुमति नहीं है?
मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत ये श्रेणियां सरोगेसी के लिए पात्र नहीं मानी जातीं:
- लिव-इन में रहने वाले जोड़े
- समलैंगिक (LGBTQ+) जोड़े
- सिंगल पैरेंट्स, चाहे पुरुष हों या महिला
- विदेशी नागरिक, इसमें OCI कार्डधारक भी शामिल हैं
- वे विवाहित दंपति जिनका पहले से एक स्वस्थ जैविक, दत्तक या सरोगेसी से जन्मा बच्चा है
किन चीज़ों पर पूरी तरह मनाही है?
- व्यावसायिक (कमर्शियल) सरोगेसी
- भ्रूण, अंडाणु या गर्भ की खरीद-फरोख्त
- भ्रूण या गेमेट का आयात-निर्यात
- किसी भी माध्यम पर सरोगेसी का विज्ञापन
- दबाव, लालच या धोखे से महिला को सरोगेट बनने के लिए प्रेरित करना
- लिंग के आधार पर या किसी अन्य कारण से नवजात का त्याग
- बिना पंजीकरण वाले क्लीनिक चलाना
- दलाल या एजेंट के ज़रिए व्यावसायिक मध्यस्थता
'दूसरे बच्चे' के लिए सरोगेसी पर रोक — और अदालतों का बदलता रुख
मौजूदा नियमों का सबसे विवादित पहलू यह है कि अगर किसी दंपति के पास पहले से एक स्वस्थ बच्चा (जैविक, दत्तक या सरोगेसी से जन्मा) मौजूद है, तो वे दोबारा सरोगेसी के लिए पात्र नहीं माने जाते। अपवाद सिर्फ तब मिलता है जब पहला बच्चा किसी गंभीर बीमारी, लाइलाज विकार या शारीरिक अक्षमता से ग्रस्त हो।
यह शर्त क्यों रखी गई थी? नीति बनाने वालों का तर्क था कि सरोगेसी को परिवार बढ़ाने का सामान्य विकल्प बनने से रोका जाए और इसे सिर्फ उन्हीं दंपतियों तक सीमित रखा जाए जिनके पास संतान का कोई और रास्ता नहीं है — ताकि व्यावसायीकरण और शोषण का जोखिम कम हो।
लेकिन हाल के महीनों में अदालतों ने इस सख्ती में मानवीय आधार पर छूट देना शुरू किया है:
- सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में एक अहम फैसले में विशेष परिस्थितियों में सरोगेसी कानून की उम्र-सीमा में छूट दी थी।
- जुलाई 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 साल से अधिक समय से विवाहित एक दंपति को राहत देते हुए कहा कि उम्र-सीमा की सख्त व्याख्या संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार से टकराती है।
- उसी महीने तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक ऐसे दंपति के पक्ष में फैसला सुनाया जिन्होंने सड़क हादसे में अपना इकलौता बेटा खोया था। अदालत ने संबंधित प्राधिकरण को 10 दिनों के भीतर पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का सिद्धांत ऐसे मामलों पर भी लागू होता है।
इसके अलावा, सेकेंडरी इंफर्टिलिटी से जूझ रहे एक दंपति की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट यह भी जांच कर रहा है कि क्या दूसरे बच्चे के लिए सरोगेसी पर लगी रोक नागरिकों के प्रजनन अधिकारों में दखल है।
इसका मतलब क्या है? कानून का लिखित प्रावधान अभी भी वही है, लेकिन अदालतें अब केस-दर-केस आधार पर विशेष परिस्थितियों — जैसे बच्चे की मृत्यु, गंभीर मेडिकल हिस्ट्री, या लंबे समय की शादी — में राहत दे रही हैं। अगर आपकी स्थिति इनसे मिलती-जुलती है, तो सही कानूनी और मेडिकल सलाह के साथ याचिका दायर करना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। इस टॉपिक पर पूरी, विस्तृत जानकारी के लिए हमारी अलग गाइड पढ़ें: दूसरे बच्चे के लिए सरोगेसी: क्या यह भारत में कानूनी है? (2026)
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
नहीं, वर्तमान कानून के तहत केवल भारतीय विवाहित दंपति ही सरोगेसी के लिए पात्र हैं।
सिर्फ मेडिकल खर्च और स्वास्थ्य बीमा दिया जा सकता है। मुनाफे के इरादे से किया गया कोई भी भुगतान गैरकानूनी है।
मुख्य रूप से सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021।
5 से 10 साल तक कारावास और 5 से 10 लाख रुपये तक जुर्माना।
हां, कानून के अनुसार सरोगेट बनने वाली महिला का कम से कम एक अपना जैविक बच्चा होना अनिवार्य है।
सामान्य नियम के तहत नहीं, जब तक कि पहला बच्चा गंभीर बीमारी या अक्षमता से ग्रस्त न हो। हालांकि हाल की अदालती फैसलों में विशेष परिस्थितियों — जैसे बच्चे की मृत्यु या लंबे समय की शादी — में राहत दी गई है, इसलिए योग्य कानूनी सलाह लेना ज़रूरी है।
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सरोगेसी का कानूनी ढांचा जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है सही विशेषज्ञों और सत्यापित क्लीनिकों तक पहुंचना। बहुत से दंपति सही जानकारी और मार्गदर्शन के अभाव में गलत क्लीनिक या अपंजीकृत सेंटर चुन बैठते हैं, जिससे कानूनी और चिकित्सकीय दोनों तरह की परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।
यहीं ConsultGrab आपकी मदद करता है। हम मरीज़ों को अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञों और सत्यापित हॉस्पिटल नेटवर्क से जोड़ते हैं, हर केस को विस्तार से समझते हैं, इलाज के विकल्प स्पष्ट रूप से समझाते हैं, और पूरी प्रक्रिया के दौरान आपके साथ खड़े रहते हैं — ताकि आप अकेले महसूस न करें और हर फैसला भरोसे के साथ ले सकें। दिल्ली एनसीआर में सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया और खर्च को विस्तार से समझने के लिए Delhi में सरोगेसी कॉस्ट गाइड ज़रूर पढ़ें।
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यह लेख भारत में सरोगेसी कानून से जुड़े नवीनतम कोर्ट फैसलों के आधार पर अपडेट किया गया है। कानून व्यक्तिगत परिस्थितियों पर अलग तरह से लागू हो सकता है, इसलिए अपने केस के लिए योग्य फर्टिलिटी विशेषज्ञ या कानूनी सलाहकार से सलाह ज़रूर लें।

