सरोगेसी क्या है? कौन करा सकता है और 2026 में क्या बदला? - इच्छुक दंपति और डॉक्टर की परामर्श बैठक

Medically Reviewed By: Dr. Kriti Tiwari

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MBBS, M.S. Obstetrics & Gynaecology, FNB – Reproductive MedicineIVF & Fertility Specialist10+ Years ExperienceLast Reviewed: October 2026

सरोगेसी वह मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें एक महिला किसी दूसरे दंपति के लिए गर्भधारण करती है और बच्चे के जन्म के बाद उसे उन्हें सौंप देती है। भारत में इसकी अनुमति सिर्फ परोपकारी (altruistic) रूप में है, और इसके लिए कानूनी पात्रता ज़रूरी है।

  • कौन करता है: इच्छुक माता-पिता (Intended Parents) के लिए सरोगेट मदर।
  • कैसे होता है: डॉक्टर IVF से लैब में भ्रूण तैयार करते हैं और सरोगेट मदर के गर्भाशय में रखते हैं।
  • भारत में नियम: कमर्शियल सरोगेसी पर रोक है और सब कुछ Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत होता है।

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सरोगेसी कैसे काम करती है?

इसमें तीन हिस्से होते हैं: इच्छुक माता-पिता, सरोगेट मदर और डॉक्टरों की निगरानी में IVF प्रक्रिया।

इच्छुक माता-पिता (Intended Parents):

  • बच्चे के जन्म के बाद उसकी पूरी कानूनी और भावनात्मक ज़िम्मेदारी इन्हीं की होती है।

सरोगेट मदर:

  • वह महिला जो करीब नौ महीने बच्चे को अपनी कोख में रखती है।
  • जन्म के बाद बच्चा इच्छुक माता-पिता को सौंप दिया जाता है।

मेडिकल प्रक्रिया (IVF):

  • डॉक्टर लैब में भ्रूण (Embryo) बनाते हैं और उसे सरोगेट मदर के गर्भाशय में रखते हैं।
  • पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में होती है।

एक आसान उदाहरण

समझिए कि बीज आपका है, पर उसे उगाने के लिए सुरक्षित ज़मीन किसी और की है।

  • मान लीजिए आपके पास एक खास पौधे का बीज है, पर आपकी ज़मीन उसे उगाने लायक नहीं है।
  • वही बीज कुछ समय के लिए दूसरी उपजाऊ ज़मीन में लगाया जाता है।
  • पौधा उसी का कहलाता है जिसका बीज था। सरोगेसी में भी गर्भ का माहौल दूसरी महिला देती है।

सरोगेसी के कितने प्रकार हैं?

मेडिकल तौर पर दो प्रकार हैं: जेस्टेशनल और ट्रेडिशनल सरोगेसी।

1. जेस्टेशनल सरोगेसी (Gestational Surrogacy)

  • आज सबसे ज़्यादा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।
  • सरोगेट मदर का बच्चे से जेनेटिक (आनुवंशिक) रिश्ता नहीं होता।
  • भ्रूण IVF से बनता है और सरोगेट मदर के गर्भाशय में रखा जाता है।

2. ट्रेडिशनल सरोगेसी (Traditional Surrogacy)

  • इसमें सरोगेट मदर का अपना अंडाणु (egg) इस्तेमाल होता है, इसलिए बच्चे से उसका जैविक रिश्ता बनता है।
  • कानूनी और भावनात्मक उलझनों की वजह से यह तरीका भारत में मान्य नहीं है।

किन हालात में सरोगेसी की सलाह दी जाती है?

जब गर्भधारण या गर्भावस्था पूरी करना किसी मेडिकल कारण से संभव या सुरक्षित न हो।

  • गर्भाशय की समस्या: जन्म से गर्भाशय न होना, या बीमारी या सर्जरी में निकालना पड़ा हो।
  • बार-बार गर्भपात या IVF असफल: कई कोशिशों के बाद भी गर्भावस्था पूरी न हो।
  • गंभीर बीमारी: हृदय, किडनी या दूसरी बीमारी, जिसमें गर्भावस्था जोखिम भरी हो।
  • कारण साफ न होना (Unexplained infertility): सारी जांच सामान्य हों, फिर भी गर्भधारण न हो।
  • ध्यान दें: सरोगेसी सबके लिए नहीं होती। इसकी ज़रूरत है या नहीं, यह विशेषज्ञ डॉक्टर मेडिकल जांच के बाद तय करते हैं।

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कमर्शियल और अल्ट्रूइस्टिक सरोगेसी में क्या फर्क है?

भारत में सिर्फ अल्ट्रूइस्टिक (परोपकारी) सरोगेसी की अनुमति है।

कमर्शियल सरोगेसी:

  • इसमें सरोगेट मदर को मेडिकल खर्च के अलावा पैसे दिए जाते हैं।
  • भारत में इस पर पूरी रोक है।

अल्ट्रूइस्टिक सरोगेसी:

  • सरोगेट मदर को अलग से कोई भुगतान नहीं मिलता।
  • इच्छुक माता-पिता सिर्फ गर्भावस्था का मेडिकल खर्च, पोषण, देखभाल और बीमा उठाते हैं।

कमर्शियल सरोगेसी की सज़ा क्या है?

  • कानून के तहत 10 साल तक की सज़ा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना बताया जाता है।

भारत में सरोगेसी का कानून क्या कहता है?

सरोगेसी (रेगुलेशन) अधिनियम, 2021 पूरे देश में लागू है। इसमें पात्रता, उम्र, मेडिकल प्रमाणपत्र और सरोगेट मदर की शर्तें तय हैं।

इच्छुक दंपति के लिए:

  • विवाहित भारतीय जोड़ा, जिसमें महिला की उम्र 23 से 50 और पुरुष की 26 से 55 साल हो।
  • विधवा या तलाकशुदा महिला भी, 35 से 45 साल की उम्र में, पात्र मानी जाती है।
  • मेडिकल कारण का प्रमाणपत्र और ज़रूरी अनुमति चाहिए।

सरोगेट मदर के लिए:

  • विवाहित महिला, उम्र 25 से 35 साल, जिसका अपना बच्चा हो।
  • वह जीवन में सिर्फ एक बार सरोगेट बन सकती है।
  • उसका 36 महीने का बीमा कराना होता है।

ध्यान दें: कानून पूरे देश का है। यह “कुछ राज्यों में लीगल, कुछ में नहीं” वाला मामला नहीं है।

2025–2026 के ताज़ा कानूनी अपडेट

अदालतों ने उम्र और पात्रता को लेकर कई बातें साफ की हैं। सुप्रीम कोर्ट में कुछ सवालों पर सुनवाई अब भी चल रही है।

मद्रास हाईकोर्ट: 50 साल की महिला 51 होने तक पात्र (जून 2026)

  • कानून में महिला की उम्र “23 से 50 साल” लिखी है।
  • हाईकोर्ट ने कहा कि 50वां जन्मदिन मनाते ही पात्रता खत्म नहीं होती। महिला 51 साल की होने तक पात्र रहेगी।
  • अदालत ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट सक्षम प्राधिकरण और मेडिकल बोर्ड के प्रमाणपत्र पर अपील की तरह दोबारा फैसला नहीं कर सकता।
  • स्रोत: Bar & Bench (27 जून 2026) | DT Nex

सुप्रीम कोर्ट: कानून से पहले शुरू हुई प्रक्रिया पर उम्र की रोक नहीं (9 अक्टूबर 2025)

  • जिन दंपतियों ने 25 जनवरी 2022 (कानून लागू होने की तारीख) से पहले भ्रूण फ्रीज़ कराकर प्रक्रिया शुरू कर दी थी, उन पर उम्र की सीमा लागू नहीं होगी।
  • कोर्ट ने कहा कि उसने उम्र की सीमा की वैधता पर फैसला नहीं दिया है।
  • स्रोत: LiveLaw (9 अक्टूबर 2025)

सुप्रीम कोर्ट में तलाकशुदा पुरुष की याचिका (अप्रैल 2025 में नोटिस)

  • एक तलाकशुदा पुरुष ने कानून के उस हिस्से को चुनौती दी है, जो सिर्फ विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को सरोगेसी की अनुमति देता है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया। मुझे इस मामले का अंतिम फैसला नहीं मिला, इसलिए ताज़ा स्थिति सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर देखें।
  • स्रोत: LiveLaw (27 अप्रैल 2025)

बिहार में सरोगेसी मॉनिटरिंग बोर्ड (जून 2025 की रिपोर्ट)

  • रिपोर्ट के मुताबिक बिहार सरकार ने सरोगेसी की निगरानी के लिए 24 सदस्यों का बोर्ड बनाया।
  • कानून पूरे देश का है। राज्य सिर्फ इसे लागू करने की व्यवस्था बनाते हैं।
  • जब तक अंतिम फैसला नहीं आता: सारे निर्णय मौजूदा कानून और सरकारी नियमों के हिसाब से ही होते हैं।

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सरोगेसी से पहले सही जानकारी क्यों ज़रूरी है?

यह सिर्फ मेडिकल नहीं, कानूनी प्रक्रिया भी है। गलत कदम से देरी, खर्च या कानूनी दिक्कत हो सकती है।

  • अपनी मेडिकल स्थिति पहले समझें।
  • सही विशेषज्ञ से सलाह लें।
  • पात्रता और ज़रूरी प्रमाणपत्र पहले जांच लें।
  • खर्च का पूरा अंदाज़ा पहले से रखें।

ConsultGrab आपकी कैसे मदद करता है

सरोगेसी का सफर लंबा है। सही जानकारी और सही विशेषज्ञ का साथ इसे आसान बनाता है।

  • आपकी स्थिति को विस्तार से समझते हैं।
  • अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञों से जोड़ते हैं।
  • इलाज और प्रक्रिया के विकल्प साफ़ भाषा में समझाते हैं।
  • अपॉइंटमेंट और पूरी प्रक्रिया में साथ रहते हैं।

संबंधित लेख (Related Articles)

सरोगेसी को और गहराई से समझें:

अदालत और उम्र से जुड़ी खबरें:

Fertility Specialists Associated With ConsultGrab

Note: इस लेख में दी गई जानकारी की समीक्षा ‘कंसल्टग्रैब’ (ConsultGrab) से जुड़े अनुभवी IVF और फर्टिलिटी विशेषज्ञों द्वारा की गई है। हालाँकि, इलाज के सुझाव व्यक्ति की चिकित्सीय स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

एक महिला दूसरे दंपति के लिए गर्भधारण करके बच्चे को जन्म देती है और बच्चा उन्हें सौंप देती है।

दो: जेस्टेशनल और ट्रेडिशनल। भारत में जेस्टेशनल सरोगेसी ही मान्य है।

नहीं। सिर्फ परोपकारी सरोगेसी की अनुमति है।

कानून की शर्तें पूरी करने वाला विवाहित जोड़ा, या पात्र विधवा या तलाकशुदा महिला, मेडिकल कारण के प्रमाणपत्र के साथ।

मद्रास हाईकोर्ट (जून 2026) के मुताबिक महिला 51 साल की होने तक पात्र रहती है।

25 से 35 साल, विवाहित, और उसका अपना बच्चा होना ज़रूरी है।

नहीं। सरोगेसी कानून पूरे देश में लागू है।

अलग से भुगतान नहीं होता। मेडिकल खर्च, देखभाल और बीमा का खर्च इच्छुक माता-पिता उठाते हैं।

शहर के हिसाब से अलग होती है। ताज़ा आंकड़े हमारे कॉस्ट गाइड में देखें।

निष्कर्ष (Conclusion)

सरोगेसी उन लोगों के लिए उम्मीद का रास्ता है जो मेडिकल कारण से खुद गर्भावस्था पूरी नहीं कर सकते। यह मेडिकल विज्ञान, विशेषज्ञों की निगरानी और कानूनी प्रक्रिया का मेल है।

  • भारत में सिर्फ परोपकारी, जेस्टेशनल सरोगेसी मान्य है।
  • पात्रता, उम्र और प्रमाणपत्र पहले जांच लें।
  • अदालतों के फैसले समय-समय पर नियमों की व्याख्या साफ करते हैं।
  • फैसले से पहले मौजूदा कानून और विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता दें।

अपनी स्थिति के हिसाब से सही विशेषज्ञ सलाह चाहिए तो ConsultGrab आपको अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से जोड़ सकता है।

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